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BMO की सील-मोहर के कथित दुरुपयोग का मामला, संविदा चिकित्सक पर गंभीर आरोप….

परिवहन विभाग को दी गई जानकारी पर उठे सवाल, जांच दल को गुमराह करने का आरोप

बिल्हा/बिलासपुर। बिना पंजीयन एम्बुलेंस संचालन की शिकायत की जांच के दौरान बिल्हा स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ एक संविदा चिकित्सक द्वारा खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) के शासकीय लेटरपेड एवं पद-मुद्रा (सील-मोहर) का कथित रूप से बिना अधिकार उपयोग किए जाने का मामला सामने आया है। मामले ने स्वास्थ्य विभाग से लेकर परिवहन विभाग तक सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, परिवहन अधिकारी के निर्देश पर विगत करीब चार वर्षों से बिना पंजीयन एम्बुलेंस संचालन की शिकायत की जांच के लिए टीम पहुंची थी। आरोप है कि इस दौरान डॉ. ए.आर. बंजारे, जो एक वर्षीय संविदा (NHM) पद पर MCH बिल्हा में पदस्थ हैं तथा CMHO द्वारा चकरभाठा में संलग्न किए गए हैं, ने BMO बिल्हा के शासकीय लेटरपेड पर जानकारी तैयार कर उस पर BMO की पद-मुद्रा का उपयोग करते हुए अपने हस्ताक्षर कर दिए।

जिस एम्बुलेंस का नंबर दिया, उसके अस्तित्व पर ही सवाल

बताया जा रहा है कि संबंधित पत्र में वाहन क्रमांक CG 02 AV-1115 का उल्लेख किया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि उक्त नंबर की कोई एम्बुलेंस वर्तमान में बिल्हा ब्लॉक में संचालित नहीं है और न ही उक्त वाहन शासन अथवा स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रदाय किया गया है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जांच दल को यह जानकारी किस आधार पर दी गई और क्या पत्र जारी करने वाले चिकित्सक को BMO की पद-मुद्रा एवं लेटरपेड इस्तेमाल करने का विधिवत अधिकार प्राप्त था?

BMO ने अधिकृत करने से किया इनकार

मामले में सबसे गंभीर बिंदु यह बताया जा रहा है कि बिल्हा BMO डॉ. श्रीकेश गुप्ता ने कथित तौर पर स्पष्ट किया है कि उन्होंने डॉ. बंजारे को BMO के रूप में हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत नहीं किया था और न ही उन्हें लिंक अधिकारी बनाया गया था।

यदि यह तथ्य जांच में सही पाया जाता है तो सरकारी पद की पहचान, लेटरपेड एवं पद-मुद्रा के इस्तेमाल को लेकर गंभीर प्रशासनिक एवं कानूनी सवाल खड़े हो सकते हैं।

BNS की धाराओं के तहत भी हो सकती है जांच

यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि किसी शासकीय दस्तावेज में जानबूझकर गलत तथ्य दर्ज किए गए, किसी अधिकारी के अधिकार/पद का गलत प्रतिनिधित्व किया गया या किसी दस्तावेज को धोखे से वास्तविक बताकर इस्तेमाल किया गया, तो परिस्थितियों के अनुसार भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 340 सहित अन्य प्रासंगिक प्रावधानों की जांच की जा सकती है। BNS धारा 340 जाली दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को जानते हुए वास्तविक के रूप में इस्तेमाल करने से संबंधित है।

हालांकि, कौन-सी धारा वास्तव में लागू होगी, यह दस्तावेज की जांच, अधिकार-पत्र, हस्ताक्षर/सील के इस्तेमाल की परिस्थितियों और संबंधित व्यक्ति की मंशा के आधार पर सक्षम जांच एजेंसी तय करेगी।

NHM की संविदा शर्तों पर भी उठे सवाल

मामले में यह भी जांच का विषय है कि संविदा चिकित्सक को विभागीय लेटरपेड, पद-मुद्रा और अधिकारी के नाम से पत्र जारी करने का अधिकार किस आदेश के तहत मिला था। यदि ऐसा कोई अधिकृत आदेश नहीं है, तो संविदा नियुक्ति की शर्तों एवं विभागीय आचरण संबंधी नियमों के उल्लंघन के पहलू की भी जांच आवश्यक हो सकती है।

जांच की मांग—कितने पत्रों में हुआ सील-मोहर का इस्तेमाल?

इस पूरे मामले में अब यह जांच बेहद जरूरी हो गई है कि—

 BMO की पद-मुद्रा डॉ. बंजारे के पास कैसे पहुंची?

 क्या उन्हें लिखित रूप से हस्ताक्षर अथवा पद-मुद्रा इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई थी?

– CG 02 AV-1115 वाहन संबंधी जानकारी किस रिकॉर्ड के आधार पर दी गई?

क्या इसी तरह अन्य शासकीय पत्र भी जारी किए गए हैं?

– संबंधित पत्र परिवहन विभाग को किस उद्देश्य से और किसके निर्देश पर दिया गया?

क्या पत्र में दी गई जानकारी का कोई विभागीय रिकॉर्ड मौजूद है?

यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल एक पत्र पर हस्ताक्षर का मामला नहीं, बल्कि शासकीय पद, लेटरपेड एवं पद-मुद्रा के कथित दुरुपयोग का गंभीर प्रशासनिक मामला बन सकता है।

अब देखना होगा कि CMHO बिलासपुर और स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले की विभागीय जांच कराते हैं या नहीं, तथा परिवहन विभाग जांच के दौरान प्रस्तुत पत्र की सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करता है या नहीं।

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