बिलासपुर -:- बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में विधायक कार्यालय को दिए गए ‘सेवा सदन’ नाम को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने विधायक सुशांत शुक्ला को कार्यालय सेवा सदन का नाम बदलकर मेवा सदन रख लेना चाहिए कि नसीहत दे डाली। गौरहा ने कहा इसके पीछे उनका सवाल क्षेत्र की जनसमस्याओं तथा विकास कार्यों की धीमी-गति,गुणवत्ता की जमीनी स्थिति को लेकर है।
गौरहा ने कहा कि बेलतरा विधानसभा में उन्होंने लगातार सड़क,नाली,जल निकासी, बिजली पेयजल,सेंदरी-मोपका बाईपास, राजकिशोर नगर,अशोक नगर से बिरकोना मार्ग,रेत उत्खनन,साइंस कॉलेज मैदान और रियल एस्टेट से जुड़े मामलों और नागरिक सुविधाओं जैसे मुद्दे उठाए हैं। उनका कहना है कि इन मुद्दों पर केवल निरीक्षण,आश्वासन या राजनीतिक बयान पर्याप्त नहीं हैं,बल्कि जनता को काम और परिणाम दिखाई देना चाहिए।
जमीनी काम और जवाबदेही पर गौरहा का सवाल..
गौरहा ने कहा कि बेलतरा क्षेत्र में विकास को लेकर कई घोषणाएं और दावे सामने आते रहे हैं,लेकिन आम लोगों की रोजमर्रा की परेशानियां अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। उनका कहना है कि किसी भी जनप्रतिनिधि के काम का आकलन केवल बैठकों,घोषणाओं या प्रचार सामग्री से नहीं,बल्कि इस बात से होना चाहिए कि नागरिकों को सुविधाएं कितनी आसानी से मिल रही हैं।उन्होंने कहा कि सड़क, नाली,जल निकासी,पेयजल,बिजली और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े मामलों में लोगों को बार-बार शिकायतें दर्ज कराने की जरूरत न पड़े,इसके लिए स्थायी समाधान और नियमित निगरानी जरूरी है। गौरहा ने यह भी कहा कि क्षेत्र में चल रहे या प्रस्तावित कार्यों की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए,ताकि जनता उनकी प्रगति,गुणवत्ता और समयसीमा पर सवाल पूछ सके।
उनके अनुसार,विकास कार्यों का वास्तविक लाभ तभी माना जाएगा,जब वे कागजों और घोषणाओं से आगे बढ़कर लोगों की जिंदगी में बदलाव लाएं।उन्होंने कहा कि जनता को यह स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए कि किस काम के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई,काम कब शुरू हुआ और उसकी गुणवत्ता की जिम्मेदारी किसकी है।
सोशल मीडिया के लाइक पर भी सियासी तंज
गौरहा ने विधायक और भाजपा संगठन की आंतरिक स्थिति को लेकर भी राजनीतिक टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्रीय विधायक से कार्यकर्ताओं और संगठन की दूरी है,विधायक के व्यक्तिगत लोग ही विधानसभा क्षेत्र का संचालन करते हैं।
गौरहा के मुताबिक,उनके सोशल मीडिया पोस्ट,फोटो और वीडियो पर कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया को लेकर भी संगठन के स्तर पर चर्चा की जा रही है।उन्होंने दावा किया कि युवा मोर्चा से जुड़े कार्यकर्ताओं की बैठक में सोशल मीडिया पर राजनीतिक पोस्टों को लाइक, शेयर अथवा प्रतिक्रिया देने को लेकर समझाइश दिए जाने की स्थिति बनी है।
गौरहा ने कहा कि यदि किसी जनप्रतिनिधि के काम और विचारों का राजनीतिक जवाब देने के बजाय कार्यकर्ताओं की सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखने की जरूरत महसूस हो रही है,तो यह स्वस्थ राजनीतिक संवाद का विषय जरूर बनता है।
बोर्ड में सेवा सदन लिखने से नहीं बदलेगी क्षेत्र की तस्वीर
गौरहा ने कहा कि ‘सेवा सदन’ नाम की असली परीक्षा इस बात से होगी कि क्षेत्र में कितनी समस्याओं का समाधान हुआ और लोगों को उसका कितना प्रत्यक्ष लाभ मिला। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की स्वीकृति और घोषणाओं के साथ उनकी प्रगति,गुणवत्ता और समयसीमा भी जनता के सामने स्पष्ट होनी चाहिए। अपने कार्यालय का नाम मात्र सेवा सदन करने से क्षेत्र की तस्वीर नहीं बदलेगी क्योंकि वर्तमान में इस नाम की सार्थकता मुझे दिखाई नहीं देती इसलिए अगर ऐसी स्थिति आने वाले समय में भी रही तो निश्चित ही विधायक सुशांत शुक्ला को अपने कार्यालय का नाम सेवा सदन से बदलकर मेवा सदन कर लेना चाहिए।



