Tuesday, June 9, 2026
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1.81 करोड़ की PMGSY सड़क पर बड़ा बवाल! विरोध के बाद बोर्ड से गायब हुआ ‘टिकरापारा’, ग्रामीण बोले—क्या बदला गया स्वीकृत मार्ग….

स्टेट हेड पूर्वी सोनी

 

महासमुंद के लालमाटी में सड़क निर्माण पर उठे गंभीर सवाल, शिकायतों और RTI के बाद बढ़ा विवाद

महासमुंद/पिथौरा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) फेस-IV के तहत ग्राम पंचायत डोंगरीपाली के आश्रित ग्राम लालमाटी में स्वीकृत 1 करोड़ 81 लाख 59 हजार रुपये की सड़क अब विवादों के केंद्र में आ गई है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जिस सड़क को “लालमाटी टिकरापारा” तक स्वीकृत किया गया था, उसे कथित रूप से दूसरे मार्ग की ओर मोड़ने की कोशिश की जा रही है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विरोध और शिकायतों के बाद सड़क निर्माण स्थल पर लगे सरकारी बोर्ड से “टिकरापारा” शब्द को पेंट कर ढंक दिए जाने का आरोप भी सामने आया है।

पहले बोर्ड पर लिखा था ‘लालमाटी टिकरापारा’, अब नाम क्यों गायब?

ग्रामीणों का दावा है कि सड़क निर्माण कार्य शुरू होने के दौरान लगाए गए PMGSY बोर्ड पर स्पष्ट रूप से लिखा था

L044 कटंगतराई-छोटेलोरम रोड से लालमाटी टिकरापारा

बोर्ड में सड़क की लंबाई 2.40 किलोमीटर और 181.59 लाख रुपये की स्वीकृत लागत भी दर्ज थी। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय तक बोर्ड पर टिकरापारा का नाम स्पष्ट दिखाई देता रहा, लेकिन जैसे-जैसे मार्ग परिवर्तन के आरोपों को लेकर शिकायतें बढ़ीं, बोर्ड से “टिकरापारा” शब्द को ही मिटा दिया गया।

 

अब ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि यदि सड़क की स्वीकृति और मार्ग में कोई बदलाव नहीं हुआ, तो बोर्ड में फेरबदल की जरूरत आखिर क्यों पड़ी?

भूमिपूजन भी ‘लालमाटी टिकरापारा’ सड़क के नाम पर हुआ था

ग्रामीणों के अनुसार सड़क निर्माण के भूमिपूजन के समय ग्राम पंचायत स्तर पर इसे **लालमाटी टिकरापारा मार्ग** के रूप में ही प्रचारित किया गया था। ग्रामीणों का दावा है कि उस दौरान पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा साझा की गई तस्वीरों और चर्चाओं में भी इसी मार्ग का उल्लेख किया गया था।

इसी कारण अब सड़क की दिशा बदलने की चर्चाओं ने ग्रामीणों के मन में संदेह और नाराजगी दोनों बढ़ा दी है।

निर्माण को बस्तीपारा की ओर ले जाने का आरोप

दीपापारा, टिकरापारा और आसपास के ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण को मूल स्वीकृत मार्ग से हटाकर बस्तीपारा की ओर ले जाने का प्रयास किया जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि ऐसा हुआ तो जिन लोगों को सड़क का सीधा लाभ मिलना था, वे योजना के लाभ से वंचित हो जाएंगे।

उनका कहना है कि यदि शासन ने टिकरापारा तक सड़क की स्वीकृति दी थी, तो फिर निर्माण की दिशा बदलने का आधार क्या है और इसकी अनुमति किस स्तर पर दी गई?

करीब दो करोड़ की परियोजना पर पारदर्शिता के सवाल

1.81 करोड़ रुपये की इस परियोजना को लेकर अब केवल मार्ग विवाद ही नहीं, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड और योजना क्रियान्वयन की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि डीपीआर, तकनीकी स्वीकृति और प्रशासनिक प्रस्ताव में एक मार्ग स्वीकृत है और जमीन पर दूसरा कार्य हो रहा है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।

📝 कलेक्टर से शिकायत, विधायक को सौंपा ज्ञापन

मामले को लेकर ग्रामीणों ने महासमुंद कलेक्टर कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कर जांच की मांग की है। साथ ही क्षेत्रीय विधायक को भी ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक निर्माण कार्य पर उठ रहे सवाल खत्म नहीं होंगे।

RTI से खुलेगा राज

ग्रामीणों ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत संबंधित विभागों से महत्वपूर्ण दस्तावेज मांगे हैं, जिनमें—

ग्राम पंचायत के प्रस्ताव

सड़क स्वीकृति संबंधी अभिलेख

मार्ग निर्धारण के दस्तावेज

डीपीआर और तकनीकी स्वीकृति,प्रशासनिक आदेश शामिल हैं।

ग्रामीणों का मानना है कि इन दस्तावेजों से स्पष्ट हो जाएगा कि सड़क वास्तव में किस मार्ग के लिए स्वीकृत हुई थी और क्या बाद में किसी स्तर पर उसमें बदलाव किया गया।

सबसे बड़ा सवाल

यदि सड़क ‘लालमाटी टिकरापारा’ के नाम पर स्वीकृत हुई, भूमिपूजन उसी नाम से हुआ और बोर्ड पर भी वही दर्ज था, तो फिर विरोध शुरू होने के बाद ‘टिकरापारा’ शब्द को बोर्ड से क्यों हटाया गया?

यही वह सवाल है जिसका जवाब अब ग्रामीण प्रशासन, PMGSY अधिकारियों और जिम्मेदार विभागों से मांग रहे हैं।

लालमाटी की यह सड़क अब केवल निर्माण कार्य नहीं रह गई है। यह मामला ग्रामीणों के अधिकार, सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और करोड़ों रुपये के सार्वजनिक धन के उपयोग से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। शिकायतों, ज्ञापनों और RTI के बाद अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं।

यदि रिकॉर्ड, बोर्ड और भूमिपूजन टिकरापारा की ओर इशारा करते हैं, तो फिर निर्माण की दिशा और बोर्ड में बदलाव को लेकर उठे सवालों का जवाब देना संबंधित अधिकारियों के लिए जरूरी हो गया है।

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