





फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स अब सट्टे के अड्डे में बदलते जा रहे हैं। यहां खुलेआम विज्ञापन देकर लोगों को लुभाया जा रहा है और गूगल पे,फोन पे,पेटीएम जैसे माध्यमों से पैसे का लेन-देन कराया जा रहा है। सवाल यह है कि आखिर इतनी खुली गतिविधियों के बावजूद जिम्मेदार एजेंसियां आखिर कर क्या रही हैं?

जब छत्तीसगढ़ प्रदेश में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सरकार थी, तब भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने “महादेव सट्टा” को लेकर जमकर हंगामा किया था। आरोप लगाए गए कि इस अवैध कारोबार को कांग्रेस का संरक्षण मिल रहा है।लेकिन आज वही लोग जब सत्ता खुद भाजपा के हाथ में है, वही मुद्दा जैसे ठंडे बस्ते में चला गया है। क्या तब के आरोप सिर्फ राजनीतिक ड्रामा थे?

प्रशासन और सरकार की चुप्पी क्यों..
युवाओं का भविष्य दांव पर, सिस्टम मौन
ऑनलाइन सट्टा सिर्फ एक अवैध कारोबार नहीं, बल्कि यह युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। आसान पैसे के लालच में युवा तेजी से इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं और हारने के बाद आत्महत्या या लुट,डकैती जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं लेकिन प्रशासन और सरकार की चुप्पी इस पूरे मामले को और गंभीर बना रही है।



